Inflation Meaning in Hindi (मुद्रास्फ़ीति क्या होता है ?)

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Inflation Meaning in Hindi (मुद्रास्फ़ीति क्या होता है ?) तो चलिए दोस्तों आज आसान भाषा में समझते हैं कि Inflation क्या होता है, इसका क्या प्रभाव पड़ता है और इसके क्या कारण है।

हम Inflation को ही हिंदी भाषा में मुद्रास्फ़ीति कहते हैं। लेकिन अब आपके मन में यह सवाल होगा कि मुद्रास्फ़ीति किसे कहते हैं। तो साधारण भाषा में महँगाई को ही मुद्रास्फ़ीति कहते हैं। मुद्रास्फ़ीति का अर्थ इस के नाम में ही छिपा है, मुद्रा का अर्थ होता है करेंसी और स्फ़ीति का अर्थ होता है फैलना या बढ़ना।

 मतलब जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में लोगों के पास पैसे बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं किसी भी सामान को खरीदने के लिए, यानी किसी सामान की demand बढ़ जाती है परंतु उस सामान की supply नहीं बढ़ती। उस स्थिति में उस सामान की कीमत बढ़ जाती है और उसे ही हम inflation कहते हैं। 

Inflation Meaning in Hindi (मुद्रास्फ़ीति क्या होता है ?)

चलिए तो अब Inflation meaning in hindi को एक उदाहरण से समझते हैं। तो चलिए मान लीजिए कि आप आज से 10 साल पहले ₹100 का जितना सामान खरीद सकते थे, तो क्या आज भी आप ₹100 का उतना ही सामान खरीद सकते हैं, नहीं हम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि जितना मूल्य उस समय ₹100 का था उतना मूल्य आज नहीं है। मतलब पैसों की कीमत में गिरावट आ रही है और इसे ही हम Inflation कहते हैं।

 और यह जो पैसों की कीमतों में गिरावट होती है, यह साल एक fix rate से होती है जैसे आपने सुना ही होगा कि इस साल पैसों में कितनी % की गिरावट हुई है और इसी चीज को हम Inflation Rate कहते हैं। जो कि पिछले कुछ साल की 4-5% तक रही है।

 तो चलिए अब इसे एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए कि इस साल Inflation Rate 5% है। तो इसका मतलब है कि जो चीज हमने पिछले साल ₹100 में खरीदी थी अब उसकी कीमत ₹105 हो गई है। मतलब जो सामान पहले हम ₹100 में खरीद सकते थे अब उसको खरीदने के लिए है हमको ₹105 देने होंगे ।

Inflation Meaning in Hindi (मुद्रास्फ़ीति क्या होता है )

Reasons of Inflation : मुद्रास्फीति के कारण

हां तो दोस्तों मैं उम्मीद करता हूं कि आप meaning of inflation in Hindi, inflation meaning in economics, inflation rate और inflation meaning को अच्छे से समझ गए होंगे तो चलिए अब देखते हैं Reasons of Inflation क्या होते हैं :- अगर reasons की बात करें तो Inflation के 2 Main reasons होते हैं :

1. Demand Push Inflation ( मांग जन्य मुद्रास्फीति )

यह एक ऐसी condition है जिसमें लोगों के पास खर्चा करने के लिए पैसा अधिक हो जाता है। ऐसे में किसी भी सामान की मांग पहले से अधिक बढ़ जाती है परंतु उसकी supply उतनी ही रहती है। जिसके फलस्वरूप उस सामान की कीमतें बढ़ने लगती है।

 a) सरकारी खर्चों में वृद्धि :

जब सरकार अपने खर्चे बढ़ा देती है, मतलब जब सरकार बहुत सारी नई-नई योजनाएं लाती है जिससे लोगों को अधिक रोजगार मिलता है तो इससे उनके पास पैसा अधिक आ जाता है और इससे मांग भी अधिक बढ़ जाती है।

b) सरकार द्वारा घाटे का बजट :

जब सरकार घाटे के बजट की पूर्ति के लिए नए पैसे छापती है तो उस condition में market में पैसे बढ़ जाते हैं। मतलब लोगों के पास अधिक पैसे हो जाते हैं और इससे demand भी बढ़ जाती  है।

c) सरकार द्वारा प्रत्यक्ष करों में कमी :

जब सरकार Tax में कमी कर देती है तो ऐसे में लोगों के पास पहले से अधिक धन बच जाता है जिससे उनकी demand भी पहले से अधिक बढ़ जाती है।

d) बैंकों द्वारा ऋण : 

अगर बैंक अपने द्वारा दिए जाने वाले loan पर interest rate कम करती है, तो लोग ज्यादा loan लेने लगते हैं जिससे demand मैं भी वृद्धि होती है।

2. Supply मैं कमी के कारण मुद्रास्फीति 

यह एक ऐसी condition है, जिसमें किसी भी सामान की demand उसकी supply से कम होती है।मतलब किसी सामान की demand ज्यादा होती है और supply कम होती है। तो ऐसे में यह inflation के बढ़ने का कारण बनती है।

  • जब व्यापारी या Producer किसी सामान की supply रोक देते हैं और सामान ज्यादा से ज्यादा खुद के पास store करने लगते हैं, तो ऐसे में market मैं उस सामान की निकली कमी पैदा हो जाती है जिससे उसकी कीमतें बढ़ने लगती है।
  • अगर कहीं प्राकृतिक आपदा आती है जैसे बाढ़ या सूखा पड़ना तो इससे वहां की सारी फसल और सारा कृषि उत्पादन नष्ट हो जाता है, जिससे market मैं उन वस्तुओं की कमी हो जाती है और overall उनकी price बढ़ जाती है।
  •  अगर खुद producer ही सामान का production कम कर दे तो भी market मैं supply कम हो जाएगी परंतु अब सवाल आता है कि producer खुद अपना सामान क्यों नहीं बेचना चाहेगा, तो इसके भी कुछ कारण है : जैसे कच्चे माल की कीमतें बढ़ना, सरकार द्वारा अधिक tax लगाना, ब्याज पर interest rate का बढ़ना, मजदूरों की कीमतें बढ़ना आदि ।

Effects of Inflation : मुद्रास्फीति का असर

तो चलिए दोस्तों अब देखते हैं कि Inflation के क्या प्रभाव पड़ते हैं (Effects of Inflation) दोस्तों inflation का प्रभाव सभी प्रकार के लोगों या समुदायों पर पड़ता है फिर चाहे वह अमीर हो या चाहे गरीब हो लेकिन इसका प्रभाव सभी लोगों पर एक जैसा नहीं होता किसी के लिए यह फ़ायदेमंद होता है तो किसी के लिए हानिकारक किसी पर इसका Positive Effect पड़ता है तो किसी पर इसका Negative Effect पड़ता है।

Positive Effects :

1. Inflation से Producers/उद्योगपतियों को फायदा होता है क्योंकि inflation से सामान की कीमतें बढ़ती हैं जिससे producers को अधिक फायदा होता है।

2. मुद्रास्फ़ीति से अमीर और अधिक अमीर हो जाता है क्योंकि मुद्रास्फ़ीति की condition मैं सभी चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इस कारण इससे अमीर लोगों की जो संपत्ति होती है उसकी कीमत और भी अधिक बढ़ जाती है।

3. इससे Shareholders को भी अधिक फायदा मिलता है क्योंकि inflation मैं कीमतें बढ़ने से यदि किसी business को फायदा होता है तो उस फायदा का कुछ प्रतिशत सभी को भी बराबर-बराबर हिस्सों में दे दिया जाता है।

4. इससे उन सामान की कीमतें बढ़ जाती है जो हम दूसरे देशों से import करते हैं। इस कारण domestic goods की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और देश को अधिक फायदा होता है।

Negative Effects : 

1 सामान का मूल्य बढ़ने से गरीब अपनी जरूरत का सामान भी नहीं खरीद पाते। Inflation से सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को ही होता है।

2. Inflation के कारण लोगों की purchasing power कम हो जाती है और living standard भी कम हो जाता है।

3. जो लोग दूसरों को उधार देते हैं inflation से उनको भी नुकसान होता है क्योंकि जो रुपए उन्होंने उधार के तौर पर दिए थे अब inflation के कारण उन रुपयों का मूल्य पहले से कम हो जाता है।

4. Inflation के कारण समाज में पैसों का distribution सही तरीके से नहीं हो पाता। इससे अमीर और अधिक अमीर हो जाता है और गरीब और अधिक गरीब हो जाता है।

5. इससे उन लोगों को भी नुकसान होता है जो नौकरी करते हैं क्योंकि उनको एक fix सैलरी मिलती है क्योंकि inflation से सामान की कीमती तो बढ़ती जाती है, परंतु उनकी सैलरी उतनी ही रहती है।

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How Inflation is Measured :

तो चलिए अब बात करते हैं कि inflation को कैसे मापा जाता है। तो basically मैं आपको इसे एक example से समझाता हूं।

मान लीजिए कि 2019 में Bread की कीमत ₹50 थी और 2020 में उसकी कीमत बढ़कर ₹60 हो गई। तो इस condition मैं bread पर 20 % inflation लगा है, जो कि हम इस प्रकार निकाल सकते हैं :

Inflation = 10/50*100 = 20%

भारत में हम दो तरीकों से inflation को निकाल सकते हैं: 

1. थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index)

2. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index)

इन index की गणना करने के लिए सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमत को लिया जाता है। इसमें जो चीजें शामिल की जाती है वह है: इंधन, धातु ,स्टॉक, बांड, मनोरंजन, खाद्य, कागज आदि। Basically इससे इसमें हमारे जरूरत की सारी चीजें आती है। 

Inflation पर नियंत्रण 

तो चलिए दोस्तों अब हम देखते हैं कि inflation पर नियंत्रण कैसे किया जाता है।  पर सबसे पहली बात की inflation पर नियंत्रण कौन कर सकता है।  inflation को control सिर्फ देश का केंद्रीय बैंक कर सकता है और अगर बात करें भारत की तो भारत का केंद्रीय बैंक RBI (Reserve Bank of India) है।  RBI 2 तरीकों से inflation को control कर सकता है :

 1. Monetary Measures (मौद्रिक उपाय)

2. Fiscal Measures (राजकोषीय उपाय)

1. Monetary Measures:

यह inflation को नियंत्रित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली method है।  ज्यादातर केंद्रीय बैंक महंगाई से लड़ने के लिए और inflation को रोकने के लिए अपने ब्याज के दर और CRR की rates को बढ़ा देती है।  जिससे loan महंगा हो जाता है और लोग कम से कम loan लेते हैं जिससे inflation भी नियंत्रण में रहता है। 

2. Fiscal Measures :

मुद्रास्फ़ीति को नियंत्रित करने के लिए Fiscal Measures मैं कराधान  (taxation), सरकारी व्यय और सार्वजनिक उधार शामिल हैInflation को रोकने के लिए सरकार कुछ संरक्षण वादी उपाय भी कर सकती है जैसे कि घरेलू वस्तुओं का समर्थन करने के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्माण पर प्रतिबंध लगाना, घरेलू खपत को समर्थन करना, आयात वस्तुओं पर शुल्क कम करके आयात को प्रोत्साहित करना।  

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